रविवार, नवम्बर 14, 2021

उपराष्ट्रपति नायडु ने राज्यपालों से लोगों को देश के विकास कार्य में हिस्सा लेने को प्रेरित करने का आग्रह किया

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपालों और उपराज्यपालों से केंद्रीय कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी में सक्रिय रहने और राष्ट्र निर्माण की पहल में लोगों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित करने की अपील की है।

नई दिल्ली में आज राज्यपालों और उपराज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए नायडु ने उनसे प्रभावी जनभागीदारी के साथ देश की प्रगति के लिए ’सब का साथ-सब का प्रयास’ के दर्शन से प्रेरित केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई व्यापक पहल की निगरानी और मार्गदर्शन करने का आग्रह किया।

नायडु ने प्रतिभागियों के साथ पर्यावरण संरक्षण, किसानों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने, सबके के लिए स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक मूल्यों और नैतिकता को बढ़ावा देने सहित कई मुद्दों पर अपने विचार और चिंताओं को साझा किया।

सार्वजनिक जीवन में राज्यपालों के विशाल अनुभव का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि नीतियों को आकार देने और उनको लागू करने, दुर्लभ संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और नैतिकता सुनिश्चित करने में उनकी अहम भूमिका है।

नायडु ने कहा, ’’राज्यपालों और उपराज्यपालों को न सिर्फ संवैधानिक अधिकार के रूप में बल्कि एक श्रेष्ठ राजनेता के नैतिक अधिकार के साथ कार्य करना चाहिए’’।

जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंताओं और जलवायु परिवर्तन पर चल रही सीओपी-26 वैश्विक सम्मेलन के संदर्भ में नायडु ने राज्यपालों से वृक्षारोपण, जल संरक्षण, पर्यावरण के अनुकूल निर्माण कार्य, अपशिष्ट प्रबंधन जैसे जलवायु के लिए अनुकूल कार्यों के लिए लोगों की गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की अपील की।

कोरोना-रोधी टीकाकरण में 100 करोड़ से अधिक के आंकडे बनाने में टीम इंडिया के प्रयासों की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने राज्यपालों से टीके लगाने में हिचकिचाहट का पता लगाने और उसे दूर करने के लिए जरूरी उपाय सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए जीवनशैली में बदलाव और सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की।

नायडु ने राज्यपालों और उपराज्यपालों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शासन और सार्वजनिक जीवन में संविधान के दर्शन और प्रावधान का कड़ाई से पालन हो।

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