गुरूवार, जनवरी 20, 2022

खुले क्षेत्रफल लाइसेंसिंग कार्यक्रम के अंतर्गत छठा निविदा चक्र शुरू: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय

अन्वेषण और निर्धारित समय-सीमा का पालन करने के लिए अपने अग्रगामी कार्यक्रम को जारी रखते हुए, सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी निविदाओं के लिए खुला क्षेत्रफल लाइसेंसिंग कार्यक्रम (ओएएलपी) के अंतर्गत निविदा चक्र 6 शुरू किया है।

इसके लिए 15 फरवरी, 2022 दोपहर 12 बजे तक निविदाएं एक समर्पित ऑनलाइन ई-बिडिंग पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती हैं। इन ब्लॉकों का आवंटन मार्च, 2022 के अंत तक पूरा होने की संभावना है। 6वें चक्र के ब्लॉकों के सफल आवंटन से 15,766 वर्ग किमी का अतिरिक्त अन्वेषण क्षेत्र जुड़ जाएगा और ओएएलपी के तहत कुल संचयी क्षेत्रफल बढ़कर 2,07,692 वर्ग किमी हो जाएगा।

हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति को मार्च 2016 में स्वीकृति दी गई थी। तेल और गैस की आयात निर्भरता में कमी और अन्वेषण एवं उत्पादन गतिविधियों में तेजी लाने के अपने निर्धारण के क्रम में, सरकार ने फरवरी, 2019 में अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति में और नीतिगत सुधारों को अधिसूचित किया था। अब ध्यान ‘राजस्व’ से ‘उत्पादन’ अधिकतमकरण पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके लिए अधिक पारदर्शिता और सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं पर निरंतर ध्यान दिया जा रहा है।

30 मार्च, 2016 को हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति के शुभारंभ के बाद से अब तक 105 अन्वेषण एवं उत्पादन ब्लॉकों के लिए खुला क्षेत्रफल लाइसेंसिंग कार्यक्रम के पांच दौर पूरे हो चुके हैं। छठे दौर के तहत 21 ब्लॉकों का आवंटन प्रगति पर है। इन 126 ब्लॉकों में 18 तलछटी घाटियों में फैले क्षेत्र का लगभग 191,926 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल है।

वर्तमान निविदा चक्र के तहत आठ ब्लॉक 6 तलछटी बेसिन में फैले हुए हैं और इसमें पांच भूमि पर (ऑनलैंड) ब्लॉक (श्रेणी- I बेसिन में चार अन्य श्रेणी-III बेसिन में एक), दो उथले पानी ब्लॉक (दोनों श्रेणी- I बेसिन में) और एक बहुत गहरे पानी वाले (अल्ट्रा डीप वाटर) ब्लॉक (श्रेणी- I बेसिन ) शामिल हैं। यह उम्मीद की जाती है कि ओएएलपी दौर VII लगभग 300-400 मिलियन अमरीकी डालर की तत्काल अन्वेषण कार्य प्रतिबद्धता उत्पन्न करेगा। इस बोली दौर के बोली दस्तावेज और विवरण https://online.dghindia.org/oalp पर उपलब्ध हैं।

हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी, जो राजस्व साझाकरण अनुबंध मॉडल को अपनाती है अब भारतीय अन्वेषण एवं उत्पादन सेक्टर में ‘व्यवसाय करने की सुगमता’ को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आकर्षक और उदार शर्तों के साथ आता है जैसे कम रॉयल्टी दरें, कोई तेल उपकर, विपणन और मूल्य निर्धारण स्वतंत्रता, वर्ष भर बोली लगाने, निवेशकों को अपनी रुचि के ब्लॉक बनाने की स्वतंत्रता, पारंपरिक और अपरंपरागत दोनों हाइड्रोकार्बन संसाधनों को कवर करने के लिए एक एकल लाइसेंस, अन्वेषण पूरी अनुबंध अवधि के दौरान अनुमति, और एक आसान, पारदर्शी और तेज बोली लगाने और देने की प्रक्रिया।

रुचि की अभिव्यक्ति जमा करने के लिए बारहवीं विंडो वर्तमान में 31 मार्च, 2022 तक खुली है।

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