मंगलवार, नवम्बर 16, 2021

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के एक दल ने कर्नाटक का दौरा किया

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के 6 सदस्यों का एक दल 27 से 30 अक्टूबर 2021 के दौरान कर्नाटक राज्य में तीन जिलों- बेंगलुरु, तुमकुर और कोलार का दौरा कर रहा है। वर्ष 2024 तक ‘हर घर जल’ सुनिश्चित करने को जल जीवन मिशन के त्वरित कार्यान्वयन हेतु जमीनी स्तर पर इसके अनुपालन को देखने और स्थानीय अधिकारियों को जागरूक करने के लिए दौरा करने वाली टीम रोजाना 3-5 गांवों का भ्रमण कर रही है।

इस दौरे के दौरान टीम जिला अधिकारियों, स्थानीय ग्राम समुदाय, ग्राम पंचायत तथा पानी समिति के सदस्यों के साथ बातचीत करेगी। इसके बाद, टीम जिला अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी और अपनी अवलोकन की टिप्पणियों को साझा करेगी। सभी ग्रामीण परिवारों को शत-प्रतिशत नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए परिपूर्णता समय सीमा को पूरा करने हेतु राज्य की तैयारियों को समझने में राज्य द्वारा कार्यक्रम के कार्यान्वयन और मिशन के तहत की गई प्रगति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी।

कर्नाटक में कुल 97.92 लाख ग्रामीण परिवारों में से 39.04 लाख (39.87%) घरों में नल से पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन के शुभारंभ के समय 24.51 लाख (25.03%) घरों में नल से जल की आपूर्ति थी। राज्य में 26 महीनों के दौरान 14.53 लाख (14.84%) घरों में नल से जल के कनेक्शन दिए गए हैं। कर्नाटक ने 2021-22 में 25.17 लाख घरों में नल से पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।

प्रत्येक ग्रामीण घर में नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देने के लिए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत कर्नाटक को 2021-22 में सहायता अनुदान को बढ़ाकर 5,008.80 करोड़ रुपये कर दिया है, जो 2020-21 में 1,189.40 करोड़ रुपये था। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आवंटन में इस चार गुना वृद्धि को मंजूरी देते हुए 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान करने के लिए राज्य को पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया। वर्ष 2021-22 में कर्नाटक को ग्रामीण स्थानीय निकायों/पीआरआई को पानी व स्वच्छता के लिए 15वें वित्त आयोग से सम्बंधित अनुदान के रूप में 1,426 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और अगले पांच वर्षों के लिए यानी 2025-26 तक ग्रामीण स्थानीय निकाय के लिए 7,524 करोड़ रुपये का निश्चित वित्त पोषण किया गया है। कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में इस वृहद् निवेश से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गांवों में आय सृजन के अवसर पैदा होंगे।

सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पानी पीने, मध्याह्न भोजन पकाने, हाथ धोने और शौचालयों में उपयोग के लिए नल के जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक कर्नाटक के 42,015 स्कूलों (100%), 53,699 आंगनवाड़ी केंद्रों (100%) को नल से पानी की आपूर्ति प्रदान की गई है।

जल जीवन मिशन को ‘नीचे से ऊपर’ दृष्टिकोण के बाद विकेन्द्रीकृत तरीके से कार्यान्वित किया जाता है, जिसमें स्थानीय ग्राम समुदाय योजना से लेकर कार्यान्वयन, प्रबंधन से संचालन और रखरखाव तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य ग्राम जल और स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/ पानी समिति को मजबूत करने, अगले पांच वर्षों के लिए प्रत्येक गांव के लिए ग्राम कार्य योजना विकसित करने, कार्यान्वयन राज्य एजेंसियों (आईएसए) को ग्राम समुदायों को संभालने और समर्थन देने जैसी गतिविधियों को शुरू करने के लिए, लोगों के बीच व्यापक जागरूकता फैलानी है। राज्य ने 25,527 हितधारकों की क्षमता का निर्माण करने की योजना बनाई है जिसमें सरकारी अधिकारी, आईएसए, इंजीनियर, वीडब्ल्यूएससी और पंचायत सदस्य भी शामिल हैं और 2,745 कुशल तथा अर्ध-कुशल कार्यबलों के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किया गया है, जिसमें राजमिस्त्री, प्लंबर, फिटर, पंप ऑपरेटर आदि शामिल हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश में 2,000 से अधिक जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं आम जनता के लिए उनके पानी के नमूनों के परीक्षण मामूली कीमत पर करने हेतु खोली गई हैं। कर्नाटक में 80 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं, जिनमें से 11 एनएबीएल मान्यता प्राप्त हैं।

15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित जल जीवन मिशन 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से पानी का कनेक्शन प्रदान करने के लिए राज्यों के साथ साझेदारी में लागू किया जा रहा है। वर्ष 2021-22 में जल जीवन मिशन का बजट 50,011 करोड़ रुपये है। राज्य के बराबर हिस्से और 15वें वित्त आयोग के रूप में 26,940 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ आरएलबी/पीआरआई को पानी और स्वच्छता के लिए इस वर्ष ग्रामीण पेयजल आपूर्ति क्षेत्र में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में इतना बड़ा निवेश निश्चित रूप से आर्थिक गतिविधियों को गति देगा।

वर्ष 2019 में मिशन की शुरुआत में देश के कुल 19.20 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17%) के पास ही नल से पानी की आपूर्ति होती थी। पिछले 26 महीनों के दौरान कोविड-19 महामारी तथा लॉकडाउन व्यवधानों के बावजूद जल जीवन मिशन को तेजी से लागू किया गया है और 5.17 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल के कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।

वर्तमान में देश भर में 8.40 करोड़ (43.72%) ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति है। गोवा, तेलंगाना, हरियाणा राज्यों तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एवं पुद्दुचेरी, दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेशों ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100% घरेलू नल कनेक्शन सुनिश्चित किए हैं। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के उद्बोधन के बाद, इस मिशन का आदर्श वाक्य है कि ‘कोई भी छूटा नहीं है’ और प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया जाए। वर्तमान में 81 जिलों और 1.20 लाख से अधिक गांवों के हर घर में नल से जलापूर्ति शुरू हो गई है।

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