शनिवार, नवम्बर 13, 2021

भारत में डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग, एडब्ल्यूएस और इंटेल ने भागीदारी कायम की

नीति आयोग फ्रंटियर टेक्नोलॉजिस क्लाउड इनोवेशन सेंटर (आईसीसी) में न्यू एक्सपीरिएंस स्टूडियो की स्थापना के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय नीति थिंक टैंक नेशन इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति आयोग), अमेजन वेब सर्विसेस (एडब्ल्यूएस) और इंटेल एक साथ आ गए हैं। नीति आयोग के नई दिल्ली स्थित परिसर में स्थित यह स्टूडियो सरकारी हितधारकों, स्टार्टअप्स, उपक्रमों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच समस्या समाधान तथा नवाचार को सक्षम बनाने के लिए सहयोग और प्रयोग के एक हब के रूप में काम करेगा।

स्टूडियो आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), अगमेंटेड रियल्टी एंड वर्चुअल रियल्टी (एआर/वीआर), ब्लॉकचेन और रोबोटिक्स जैसी प्रौद्योगिकियों की क्षमताओं के प्रदर्शन में सहायता करेगा, जिससे उसके सार्वजनिक क्षेत्र में उपयोग में तेजी लाई जा सकेगी। स्टूडियो मुक्त नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा भारत के गैर लाभकारी स्टार्टअप्स को अपने समाधानों के प्रदर्शन के लिए एक हब के रूप में काम करेगा। यह स्टार्टअप्स को अपने समाधानों के विकास और विस्तार के लिए जरूरी समर्थन तक पहुंच का विकल्प उपलब्ध कराएगा।

नीति आयोग स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में जिओस्पैटियल, एआर/वीआर, ड्रोन और आईओटी समाधानों के उपयोग के प्रदर्शन के लिए भी स्टूडियो का उपयोग करेगा। प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के संबंधित प्रमुख घरेलू इंडस्ट्री लीडर- जैसे जिओस्पैटियल सॉल्युशंस में मैपमाईइंडिया, अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (यूएवी) में राफे एमफाइबर प्रा. लि., न्यूरोसाइंस एंड जीनोमिक्स (केयरिंग) जो स्वास्थ्य में एआई की आपूर्ति करता है- और दसॉ सिस्टम्स जैसी वैश्विक स्तर पर अग्रणी कंपनियां स्टूडियो में अपने सॉल्युशन का प्रदर्शन कर रही हैं। विजारा टेक्नोलॉजिस और अगत्सा सॉफ्टवेयर प्रा. लि. जैसे स्टार्टअप्स अपने नवीन उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। स्टार्टअप्स को हैकाथॉन, ग्रांड चैलेंज और अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) व अटल इनक्यूबेशन सेंटर्स (एआईसी) के साथ भागीदारी में अन्य क्षमता निर्माण पहलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार की उपस्थिति में नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत और अमेजन इंटरनेट सर्विसेज प्रा. लि. (एआईएसपीएल), एडब्ल्यूएस इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रेसिडेंट (पब्लिक सेक्टर) राहुल शर्मा ने आज स्टूडियो का उद्घाटन किया। इंटेल के वीपी और एमडी –सेल्स, मार्केटिंग और कम्युनिकेशन ग्रुपप्रकाश माल्या वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन में शामिल हुए।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा, “कोविड-19 महामारी ने दिखाया है कि देश में विस्तार की समस्या के समाधान के लिए नवीन सॉल्युशंस के विकास के दौरान प्रभावी सहयोग और प्रयोग काफी महत्व रखता है। नीति आयोग फ्रंटियर टेक्नोलॉजिस सीआईसी समाधान के लिए सामाजिक चुनौतियों की पहचान करता है, इसलिए मुक्त नवाचार की संस्कृति को अपनाना और समस्याओं के पीछे काम करना महत्वपूर्ण है। एडब्ल्यूएस और इंटेल के साथ न्यू एक्सपीरियंस स्टूडियो से नागरिकों को सेवाएं देने में निरंतर नवाचार को बढ़ावा देने में अत्याधुनिक तकनीकों की पहचान और लागू करने के हमारे मिशन को समर्थन मिलेगा।”

एआईएसपीएल, एडब्ल्यूएस इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रेसिडेंट (सार्वजनिक क्षेत्र) राहुल शर्मा ने कहा, “नीति आयोग फ्रंटियर टेक्नोलॉजिस सीआईसी में न्यू एक्सपीरियंस स्टूडियो एडब्ल्यूएस क्लाउड इनोवेशन सेंटर्स प्रोग्राम पर आधारित है, जिसका उद्देश्य भागीदारी और प्रयोग व प्रोटोटाइप से नवाचारों को साकार करके सार्वजनिक क्षेत्र की चुनौतियों का तत्काल समाधान निकालना है। स्टूडियो से विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों, सरकारी हितधारकों और स्टार्टअप्स समस्‍याओं की गहराई तक जाने के लिए डिजाइन थिंकिंगको लागू करने और डिजिटल हैल्थकेयरको सक्षम बनाने, डिजिटल कृषि इकोसिस्टम के निर्माण तथा भारत में स्मार्ट सिटीज के लिए डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चरके विकास में मदद मिलेगी।यह समुदाय से मिली चुनौतियों के समाधान के उद्देश्य से रचनात्मकता, प्रयोग और नए विचारों के परीक्षण के केंद्र के रूप में काम करेगा।”

इंटेल इंडिया वीपी एवं एमडी- सेल्स, मार्केटिंग और कम्युनिकेशन ग्रुप के प्रकाश माल्या ने कहा, “क्लाउड नवाचार विभिन्न क्षेत्रों को व्यापक रूप से प्रभावित करने वाली भविष्य की प्रौद्योगिकियों की क्षमताओं के दोहन का आधार है। इंटेल क्लाउड सेवाओं के विकास, निर्माण और समर्थन के लिए नीति आयोग और एडब्ल्यूएस के साथ अपनी भागीदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी संसाधन तथा ज्ञान तक पहुंच बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। ये क्लाउड सेवाएं भारत और दुनिया भर में लोगों की जिंदगी को समृद्ध बना सकती हैं। नया नीति आयोग सीआईसी एक्सपीरियंस स्टूडियो सार्थक सामाजिक प्रभाव औरतकनीक समाधानों में तेजी लाने के लिए उद्योग से मिले सहयोग का एक शानदार उदाहरण है।”

नीति आयोग फ्रंटियर टेक्नोलॉजिस सीआईसी स्थित एक्सपीरियंस स्टूडियो निर्बाध रूप से सहयोग के लिए फिजिकल और वर्चुअल वर्कप्लेस को संभव बनाने के लिए एक हाइब्रिड मॉडल को अपनाएगा। स्टूडियो में बने फिजिकल वर्कप्लेस में आगे के कदमों के लिए विचारों पर सहमति के उद्देश्य से सॉल्युशंस का प्रदर्शन, संवाद और हितधारकों के बीच तेजी से प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। स्टूडियो के डिजिटल वर्कप्लेस से व्यावहारिक कार्यशालाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों, सरकारी विभागों, शोध संस्थानों और गैर लाभकारी संगठनों से विशेषज्ञों को आमंत्रित करने के लिए अत्याधुनिक भागीदारीपूर्ण माहौल तैयार करना संभव होगा।

नीति आयोग फ्रंटियर टेक्नोलॉजिस सीआईसी को एडब्ल्यूएस क्लाउड इनोवेशन सेंटर ग्लोबल प्रोग्राम के तहत अक्टूबर, 2020 में स्थापित किया गया था। भारत में मौजूद चुनौतियों से पार पाने पर जोर देते हुए, सीआईसी ने हाल में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोवैड का विकास किया था। पांच दिनों में विकसित, कोवैड ने कोविड-19 से प्रभावित लोगों को सहयोग के लिए हासिल सहायता के पूर्ण रूप से समेकित करने, पारदर्शी तरीके से सहायता के वितरण और लाभार्थियों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया। एक अन्य उदाहरण में, डिजी यात्रा फाउंडेशन के साथ काम करते हुए सीआईसी ने डिजिटल यात्रा सेंट्रल इकोसिस्टम (डीवाईसीई) चैलेंज की अगुआई की।हवाई यात्रा के दौरान यात्रियों को व्यवधान रहित, परेशानी मुक्त, संपर्क रहित और सुरक्षित अनुभव उपलब्ध कराने के लिए एक रियल टाइम फेसियल बायोमीट्रिक वैलिडेशन के विकास के लिए स्टार्टअप्स को आमंत्रित किया।

एडब्ल्यूएस पब्लिक सेक्टर सीआईसी ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में मौजूद है। इस साल की शुरुआत में, एडब्ल्यूएस ने भारत में इलेक्ट्रॉनिकीऔर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के साथ मिलकर देश में एक क्वांटम कंप्यूटिंग एप्लीकेशन लैब की स्थापना की, जो सरकार की विज्ञान और तकनीक प्राथमिकताओं के अनुरूप क्वांटम कंप्यूटिंग की प्रमुखता वालेअनुसंधान और विकास में तेजी लाने व नई वैज्ञानिक खोजों को सक्षम बनाने पर केंद्रित है।

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