शुक्रवार, नवम्बर 12, 2021

भारत ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए सतत विमानन ईंधनों सहित सतत जैव ईंधनों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रहा है : डॉ. जितेन्‍द्र सिंह

भारत ने ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और शमन उपायों के रूप में वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सतत ईंधनों, रसायनों और सामग्रियों तक पहुंच के लिए वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा समुदाय से प्रतिबद्धता का आह्वान किया।

मिशन नवाचार पहल के लिए 26वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की पार्टियों (सीओपी26) को संबोधित करते हुए, केन्‍द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने इस अवसर पर लॉन्‍च किए गए नव विकसित मिशन ‘‘एकीकृत बायो रिफाइनरीज’’ के माध्‍यम से मिशन नवाचार 2.0 की दिशा में मिशन नवाचार के सदस्‍यों के साथ भारत और नीदरलैंड द्वारा किए गए प्रयासों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

उन्‍होंने कहा कि भारत ‘‘मिशन नवाचार’’ के माध्‍यम से, प्रेरित करने वाले नवाचार लक्ष्यों को उत्‍प्रेरित करने के सहयोगात्मक प्रयासों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा समाधानों का सस्‍ता और बड़े पैमाने पर विकास होगा। उन्होंने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा समुदाय का इस मिशन में वैश्विक जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने का स्वागत किया ताकि इस मिशन के सार्वभौमिक उद्देश्यों को समय रहते प्राप्‍त किया जा सके।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि मिशन नवाचार के माध्यम से भारत का नीदरलैंड के साथ उद्देश्य ‘‘मिशन इंटीग्रेटेड बायो रिफाइनरियों’’ के लॉन्च के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार, स्टार्ट-अप इको सिस्‍टम के लिए समर्थन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में अपने व्‍यापक अनुभव का लाभ उठाना है। उन्होंने कहा कि यह मिशन देशों के गतिशील और आपूर्ति केन्द्रित गठबंधन, निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और सिविल सोसायटी को एक मंच पर लाता है ताकि कम कार्बन वाले भविष्‍य के लिए नवीकरणीय ईंधनों, रसायनों और सामग्रियों के संबंध में नवाचारों में तेजी लाई जा सके।

मंत्रियों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और सरकारी तथा निजी क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि परिवहन और रासायनिक क्षेत्रों का ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन वैश्विक उत्सर्जन का लगभग एक तिहाई है जिसमें बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है। उन्‍होंने कहा कि भारत जैव प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से सतत विमानन ईंधनों सहित सतत जैव ईंधन में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रहा है।

उन्‍होंने कहा कि सतत ईंधन, रसायनों और सामग्रियों के लिए जैव रिफाइनरी प्रौद्योगिकियों का विकास और प्रदर्शन जैव-आधारित समाधानों के विकास को तेज करने में मदद कर सकता है और उसे ऐसे कम कार्बन भविष्य का निर्माण करने के हमारे प्रयासों में सबसे आगे होना चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ समाज के लिए कल्याणकारी भी हो।

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