शनिवार, अक्टूबर 23, 2021

राजीव गांधी नहीं, अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर होगा खेल रत्न अवॉर्ड, पीएम मोदी ने किया ऐलान

41 साल बाद पुरुष हॉकी टीम ने मेडल जीता, तो वहीं महिला टीम पहली बार ओलिंपिक के सेमीफाइनल तक पहुंची। टोक्यो ओलिंपिक में पुरुष और महिला हॉकी टीम के शानदार प्रदर्शन के बाद से देश में एक बार फिर लोग हॉकी को प्यार देने लगे है।

इसी बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया है । भारत में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे बड़े सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया गया है। बता दें कि मेजर ध्यानचंद ने भारत को लगातार 3 बार ओलिंपिक में गोल्ड मेडल दिलवाया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की जानकारी खुद ट्वीट करके दी है। पीएम मोदी ने लिखा कि लोगों की भावनाओं को देखते हुए इस अवार्ड का नाम अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है।

खेल रत्न का इतिहास, कब हुई इसकी शुरुआत

खेल रत्न अवार्ड की शुरुआत साल 1991-92 में किया गया था, इस सम्मान की स्थापना खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता के लिए की गई थी। खेल रत्न पुरस्कार का मकसद खिलाड़ियों को सम्मानित कर समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाना है, ताकि वह समाज में और ज्यादा सम्मान प्राप्त कर सकें। उस समय इसका नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था।

बता दें कि इस पुरस्कार को पाने वाले पहले खिलाड़ी शतरंज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद थे।

इस पुरस्कार में खिलाड़ियों को सम्मान के रूप में एक पदक, सम्मान सहित एक प्रमाण पत्र और नकद इनाम मिलता है। खेल रत्न पुरस्कार खिलाड़ियों को हर साल दिया जाता है, जिसमें बेहतर खेल प्रदर्शन के लिए खिलाड़ी या टीम को सम्मानित किया जाता है।

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