आने वाले दिनों में अगर आपको पेट्रोल-डीजल 45 रुपये लीटर मिलने लगे तो आश्चर्य मत कीजिएगा। ऐसा हो सकता है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये लीटर के पार पहुंचे पर मोदी सरकार इसके दाम कम करने पर शिद्दत से विचार कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर टैक्स घटाने को लेकर कुछ राज्यों, तेल कंपनियों और पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ चर्चा की है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय चाहता है कि कोई ऐसा रास्ता निकले, जिससे सरकार की आमदनी पर भी असर ना पड़े और आम जनता को भी राहत मिल जाए।

पहला रास्ता: केंद्र सकरार उत्पाद शुल्क और राज्य सरकारें घटाएं वैट
दुनिया का इंजन अभी भी पेट्रोल-डीजल से ही चल रहा है। इसके दाम में बदलाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है चाहे वह वाहन चलाता हो या नहीं। कच्चे तेल के दाम में लगातार वृद्धि होने से भारत में सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ा रही हैं। फरवरी में ही दोनों ईंधन करीब 5 रुपये लीटर बढ़ चुके हैं। वहीं कच्चे तेल की कीमतें बीते 10 महीने में डबल हो चुकी है, जिसने घरेलू बाजार यानी भारत में तेल की कीमतों पर असर डाला है। भारत के लोगों को तेल की महंगाई का बोझ केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स की वजह से कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है।

दूसरा रास्ता: पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आए
अगर जीएसटी की बात करें जीएसटी में कई स्लेब हैं, जिनके आधार पर टैक्स वसूला जाता है। अगर पेट्रोल की कीमतों पर सबसे बड़ा स्लैब यानी 28 फीसदी वाला स्लैब भी लगाया जाए तो पेट्रोल की कीमतें अभी से काफी कम हो जाएगी। जी हां। ऐसे में टैक्स देने के बाद भी आपको पेट्रोल की कीमत काफी कम चुकानी पड़ेगी।

वहीं, इस बारे में केडिया एडवाइजरी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय केडिया ने टीवी9 को बताया, ‘अगर पेट्रोल की कीमत जीएसटी में आती है तो एक्साइज ड्यूटी और वैट हट जाएगी। इस पर सरकार ज्यादा से ज्यादा 28 फीसदी जीएसटी लगा सकती है। साथ ही राज्य सरकार वैट नहीं लगा पाएगी और रेवेन्यु बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कोई टैक्स लगाती है तो वो सेस के रुप में लगा सकती है, जो भी बहुत ज्यादा नहीं होगा।’

अगर सिर्फ दिल्ली की बात करें तो अभी डीलर बेस प्राइज 33.54 रुपये हैं. जिस पर अधिकतम स्लैब के साथ 28 फीसदी टैक्स वसूला जाए तो 9.3912 रुपये टैक्स होता है। वहीं, डीलर कमीशन करीब 3 रुपये जोड़ दें तो ऐसे में आपको महज 45.93 रुपये लीटर पेट्रोल मिलेगा। अभी के हिसाब से पेट्रोल करीब 45 रुपये ज्यादा है। साथ ही अगर इसमें कोई सेस भी जोड़े जाते हैं तो भी पेट्रोल की कीमत काफी कम हो जाएगी।

पेट्रोल-डीजल के रेट पर ये होगा असर
जीएसटी की उच्च दर पर भी पेट्रोल-डीजल को रखा जाए तो मौजूदा कीमतें घटकर आधी रह सकती हैं।
यदि जीएसटी परिषद ने कम स्लैब का विकल्प चुना, तो कीमतों में कमी आ सकती है।
भारत में चार प्राथमिक जीएसटी दर हैं – 5 फीसद, 12 फीसद, 18 फीसद और 28 फीसद
अगर पेट्रोल को 5 फीसद जीएसटी वाले स्लैब में रखा जाए तो यह पूरे देश में 37.57 रुपये लीटर हो जाएगा और डीजल का रेट घटकर 38.03 रुपये रह जाएगा।
अगर 12 फीसद स्लैब में ईंधन को रखा गया तो पेट्रोल की कीमत होगी 40 फीसद और डीजल मिलेगा 40.56 रुपये।
अगर 18 फीसद जीएसटी वाले स्लैब में पेट्रोल आया तो कीमत होगी 42.22 रुपये और डीजल होगा 42.73 रुपये।
वहीं अगर 28 फीसद वाले स्लैब में ईंधन को रखा गया तो पेट्रोल 45.79 रुपये रह जाएगा और डीजल होगा 46.36 रुपये।

यहां है दिक्कत
राज्य पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को तैयार नहीं हैं। 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू किया गया था। उस समय राज्यों की उच्च निर्भरता के कारण पेट्रोल और डीजल को इससे बाहर रखा गया था। जीएसटी में पेट्रोलियम उत्पादों को शामिल किया जाता है, तो देश भर में ईंधन की एक समान कीमत होगी।

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