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चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का शांतिपूर्ण ढंग से मतदान कराने का दावा आज खोखला साबित होता नजर आ रहा है। तीन चरणों में शांतिपूर्ण मतदान होने के बाद चौथे चरण के मतदान के दिन में बंगाल में कई जगह जबरदस्त हिंसा देखने को मिली।

कूचबिहार के सितालकुची में टीएमसी-बीजेपी के कार्यकर्ता वोटिंग के दौरान आपस में भिड़ गए, जिसमें चार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह घटना सीतलकुची के गोकुलगंज का है। पश्चिम बंगाल के एडीजीपी जगमोहन ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में सीआईएसएफ द्वारा फायरिंग किए जाने की बात की पुष्टि भी की।

हालांकि, सेना द्वारा फायरिंग करने की वजह को एडीजीपी ने बताया। उन्होंने कहा कि वोटिंग के लिए बूथ पर आया एक लड़का बीमार हो गया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों और सेना के बीच झड़प हुई, इस दौरान लोगों ने जवानों पर हमला कर दिया। हमले के जवाब में सेना को गोली चलानी पड़ी।
फिलहाल इन दोनों जगह पर चुनाव आयोग ने वोटिंग को स्थगित कर दिया है।

टीएमसी का आरोप

उधर, टीएमसी ने चुनाव आयोग और सेना पर सीधे आरोप लगाया है। टीएमसी नेता डोला सेन ने कहा कि केंद्रीय पुलिस बल स्थानीय लोगों के साथ लगातार अन्याय कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने दो बार फायरिंग की। इस झड़प में माथाभंगा( कूचबिहार) ब्लॉक 1 में एक की मौत हुई और 3 लोग घायल हो गए, जबकि सीतालकुची में हुई फायरिंग से तीन लोगों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा।

डोला सेन ने आगे कहा कि जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्रीय बल को बाहर करने की बाद कहती है तो चुनाव आयोग द्वारा नोटिस भेज दिया जाता है।

उधर, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री का इस्तीफा की मांग कर डाली है।

हालांकि, इस घटना पर चुनाव आयोग ने जल्द रिपोर्ट देने को कहा है। अब देखना यह है कि तीन चरण में शांतिपूर्ण ढंग से मतदान होने के बाद अपनी वाहवाही करने वाली केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इसकी जिम्मेदारी भी लेते है या नहीं?

By : Sumit Anand

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