सोमवार, अक्टूबर 25, 2021

यूपी सरकार के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा पुनर्विचार करें राज्य सरकार : जानिए यूपी सरकार के कौन से फैसले पर कोर्ट ने नाराजगी जताई

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है जिसमें यूपी सरकार ने कांवड़ यात्रा की अनुमति दी है। कोर्ट ने साफ-साफ यूपी सरकार अपने आदेश पर पुनर्विचार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार अपने फैसले पर विचार करें, नहीं तो हमको जरूरी आदेश देना पड़ेगा। उधर, इस सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दायर किया था जिसमें कहा था कि वो इस वक्त कांवड़ यात्रा के पक्ष में नहीं है। हलफनामे में केंद्र ने कांवड़ लेकर अपने इलाके के मंदिर में जाने से बेहतर टैंकर के जरिए जगह-जगह गंगाजल पहुंचाया जाने को बताया है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामा कहा है कि राज्य सरकारों को कोविड के मद्देनजर कांवड़ियों को हरिद्वार से ‘गंगा जल’ लाने के लिए आवाजाही की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हालांकि, केंद्र ने धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह जरूर कहा है कि राज्य सरकारों को टैंकरों के माध्यम से ‘गंगा जल’ उपलब्ध कराने चाहिए।

साथ ही यह भी कहा है कि टैंकर चिन्हित/निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध हों ताकि आस-पास के भक्त ‘गंगा जल’ को इकट्ठा कर अपने नजदीकी शिव मंदिरों में ‘अभिषेक’ कर सकें। इस दौरान कोरोना के नियमों को पालन कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी। उन्हें ही सुनिश्चित करना होगा कोरोना नियमों का पालन कैसे कराया जाए।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील सीएस वैद्यनाथन से सवाल किया कि कांवड़ यात्रा को लेकर आपका क्या कहना है। इसपर वैद्यनाथन ने कहा, धार्मिक महत्व को देखते हुए साथ ही वैक्सीनेशन और नेगेटिव आरटीपीसीआर के आधार पर अनुमति है। इसके बाद कोर्ट ने कहा, “हम आपको एक और मौका देना चाहते हैं विचार करने का। आप सोचिए कि यात्रा को अनुमति देनी है या नहीं। हम सब भारत के नागरिक हैं। सबको जीवन का मौलिक अधिकार है। हम आपको सोमवार तक समय दे रहे हैं। नहीं तो हमको जरूरी आदेश देना पड़ेगा।”

कोर्ट ने आगे कहा, “यूपी सरकार हलफनामा दाखिल करे और बताए कि क्या सरकार तैयार है कि यात्रा को अनुमति न दी जाए। सोमवार सुबह तक हलफनामा दें। हमारा शुरुआती विचार यही है कि यह मामला भारत के हर नागरिक के जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। यह अधिकार सर्वोच्च है। सभी तरह की धार्मिक भावनाएं इसके बाद आती हैं।”

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